आरक्षण हक नहीं है- स्वस्थ समाज की व्यवस्था है।
आरक्षण उन्हें दो जो अब तक आर्थिक तौर से पिछड़े है, आरक्षण उन्हें दो जो दलित और पिछड़े है किन्तु जिनकी पुश्तो में अब तक किसी को आरक्षण का लाभ नहीं मिला है, आरक्षण उन्हें दो जो पिछड़ी या दलित जाति में पैदा नहीं हुए पर उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय है, आरक्षण उन्हें दो जिनके सिर पर पिता का साया नहीं है, आरक्षण उन्हें दो जिन बहनो के पति युवा अवस्था में काल के गाल में समा गए।
आरक्षण पर लङो मत आरक्षण समाज में सब बहनो और भाइयों को वह हक दिलाने की व्यवस्था है जिससे वह भी लोकतांत्रिक भारत में राजनैतिक - आर्थिक - सामाजिक तौर पर अपने आप में पिछङा न महसूस करें।
मेरी राय है देश के नौजवान यदि वास्तव में आरक्षण का पूरा लाभ पूरे देश के वंचितो को दिलाना और आरक्षण व्यवस्था के वृहद सोच को वास्तविक धरातल पर आता हुआ देखना चाहते हैं तो पहले वह जिनकी पुश्तो में एक बार भी किसी तरह का आरक्षण का लाभ मिला है उन्हें अपने सहोदर भाई के हक के लिए आगे आकर जो अब तक आरक्षण से वंचित परिवार हैं उनको मौका देना चाहिए ।
नौजवान मित्रों आगे आओ और जिस वृहद सोच से आरक्षण की व्यवस्था देश में बनी उसे धरातल पर लाओ उन्हें हक दिलाओ जो अब तक पीछे टूटे हुए हैं ।