(एक अजन्मी बेटी का अपनी माँ से अपने जन्म को लेकर संवाद जिसमें बेटी अपनी परिवेदना को अभिव्यक्त करती हैं. )
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मेरी आयुष्य की डोरी को, जननी मत यूँ न तोड़ो.
मैं भी जन्मू इस धरती पर , मुझे अपनों से जोड़ो.
आयुष्य पूर्व मुझे न मारो , मेरी तुमसे विनती.
सब कुछ भैया को दे देना , मत करना मेरी गिनती.
देख रही हूं ओझल आयुष्य, प्रचरित पैशाचिक तिमिर का.
हर निमिष जकड़े तदबीर में, मुझको रामकों का मुहासिरा.
मेरे आयुष्य की डोरी को , जननी मत यूं न तोड़ो.
मैं भी जन्मू इस धरती पर , मुझे अपनों से जोड़ो.
आयुष्य पूर्व मुझे न मारो , मेरी तुमसे विनती.
सब कुछ भैया को दे देना ,मत करना मेरी गिनती.
क्यों इतनी दयाशून्य हुई जननी ? क्या है मेरी गलती.
हाय विधाता , कैसी दुनिया ? नारी , नारी को छलती.
समझ सको तो समझो जननी , मुझ बिन सूना आंगन.
मेरी आयुष्य की डोर को, जननी मत यूँ न तोड़ो.
मैं भी जन्मू इस धरती पर , मुझे अपनों से जोड़ो.
आयुष्य पूर्व मुझे न मारो , मेरी तुमसे विनती.
सब कुछ भैया को दे देना , मत करना मेरी गिनती.
याद आऊंगी जब तुमको , होगा दूभर आयुष्य.
मेरी वेदना सुनो हे जननी , बनो न तुम हत्यारी.
आयुष्य प्रदेय करो तुम जननी , धर्म यही है तेरा.
मृत्यु का भय मुझे सताता , हर निमिष मन घबराता.
मेरी आयुष्य की डोरी को, जननी मत यूँ न तोड़ो.
मैं भी जन्मू इस धरती पर , मुझे अपनों से जोड़ो.
आयुष्य पूर्व मुझे न मारो , मेरी तुमसे विनती.
सब कुछ भैया को दे देना , मत करना मेरी गिनती.
पलने दो तुम मुझे गर्भ में , मुझे न मारो जननी.
लक्ष्य जीव का आयुष्य है, क्यों मनमानी करती.
बेटी है सौगात ईश की , स्वर्ग इसी से धरती.
मेरी आयुष्य की डोरी को, जननी मत यूँ न तोड़ो.
मैं भी जन्मू इस धरती पर , मुझे अपनों से जोड़ो.
आयुष्य पूर्व मुझे न मारो , मेरी तुमसे विनती.
सब कुछ भैया को दे देना , मत करना मेरी गिनती.
चाह नहीं हैं धन दौलत की, बस आयुष्य पाना.
इस आयुष्य का एक उद्देश्य मात्र हैं तेरा स्नेह पाना.
मेरी आयुष्य की डोरी को, जननी मत यूँ न तोड़ो.
मैं भी जन्मू इस धरती पर , मुझे अपनों से जोड़ो.
आयुष्य पूर्व मुझे न मारो , मेरी तुमसे विनती.
सब कुछ भैया को दे देना , मत करना मेरी गिनती.