Tuesday, 11 May 2021

मेला

मेला आया मेला आया, 
बच्चे फिरते फूले-फूले।
मेले में वो जाएंगे ,
चाट पकौड़ी खाएंगे।
खेल-खिलौने लाएंगे, 
दृश्य कई मेले में देखे ।
सर्कस देखा तम्बू वाले,
झूला-झूले चकरी वाले।
कई मिले जाने अनजाने,
अपना-पन बढ़ता मेले से।
प्रेम का रंग चढ़ता मेले में,
मेला जब भी आता है ।
मन को खूब लुभाता है, 
मेला आया मेला आया।

-आशुतोष सिंह चौहान 

Monday, 26 April 2021

माँ

रोते - रोते जो हँसा दे,
उसका नाम है माँ।
चिंता में भी हो मस्ती करा दे, 
उसका नाम है माँ।
जब हर कोई हमे गलत समझे, 
उस वक़्त जो साथ निभाये वो है माँ।
चाहे हजार बहाने बना लो पर, 
उन बहानो के बाद भी जो खाना खिलाए वो है माँ।
हर सुख - दुःख में जो साथ रहती हैं, 
उस रिश्ते का नाम है माँ।
जब वक़्त थम जाये, दूर जाने का डर सताये,
इसी प्यारे रिश्ते का नाम है माँ। ❣️💕❣️

-तृप्ति सिंह (सिया) 

PC- Ashutosh Singh Chauhan