विश्वास भरे मन अधरों से,
नारायण - भक्त पुकार किए ।
धर नरसिंह रूप रचयों,
प्रकट भय खंड खम्भों से ।
देख नारायण रूप विकराल।
मची सभा में हाहाकार,
राज भवन की चौखट पर,
रख जंघन पर चीर दिए ।
हिरण्यकश्यप - संहार किए
अहम् सब चकनाचूर हूए।
- आशुतोष सिंह "चौहान"