Thursday, 22 June 2017

जीवन का आइना

                  जीवन का आइना

एक शहर मे एक कॉलोनी थी। उस कॉलोनी में कई फ्लैट बने हुए थे और कुछ अमीर लोगों के बंगले भी थे। उसी में एक छोटे से फ्लैट में एक गरीब सा परिवार रहता था। ठीक उसी गरीब परिवार के फ्लैट के सामने एक अमीर परिवार का बड़ा आलीशान सा बंगला था।

बडी - बडी  गाड़ियां थीं, नौकर चाकर थे। गरीब परिवार में एक छोटा बच्चा था उसके पापा रोज उसे स्कूटर पर स्कूल छोड़ने जाते थे। वो बच्चा जब उस बंगले की तरफ देखता तो सोचता काश हमारा भी ऐसा ही घर होता। उस अमीर परिवार में भी एक बच्चा था, जब वो बच्चा बड़ी सी कार में स्कूल जाता और उसका ड्राइवर उसको स्कूल छोड़ने जाता तो वो गरीब बच्चा सोचता काश हम भी अमीर होते।

जब वो गरीब बच्चा उस अमीर बच्चे को देखता तो सोचता यार मेरी किस्मत कितनी खराब है,, उस लड़के की किस्मत कितनी अच्छी है

अब कहानी में थोड़ा सा रोमांचक मोड़ आता है, रोजाना शाम को कॉलोनी के सभी घरों के बच्चे इकट्ठे होकर आपस में खेल खेलते हैं, कभी क्रिकेट खेलते हैं तो कभी पकड़म पकड़ाई। पूरी शाम कॉलोनी के बच्चे खूब मजे करते हैं।

लेकिन उस अमीर घर के बच्चे को कहीं भी जाना allow नहीं है। सबसे पहले तो सिक्योरिटी का डर, आखिर अमीर घर का बच्चा है कोई अपहरण कर सकता है। दूसरा अमीर लोगों का एटीट्यूट होता है कि इन सब लोगों से हम अमीर हैं तो हम इनके साथ नहीं रहेंगे। इसलिए उस बच्चे के घर से बाहर जाने पर पाबन्दी थी।

अब वो बच्चा रोजाना शाम को अपने बंगले की छत पर खड़ा होकर उन कॉलोनी के सभी बच्चों को मस्ती करते देखता तो उसकी आखों में आंसू आ जाते। वो भी आजादी चाहता था, वो भी उन बच्चों के साथ खेलना चाहता था।

उस बच्चे के घर में हजारों खिलौने थे लेकिन उसके साथ खेलने वाला कोई नहीं था। पिताजी बिजनिस में बीजी रहते थे और मम्मी भी पार्टी और अपनी सहेलियों में बीजी रहती थी। अब बड़े से बंगले और कई नौकर चाकर होने पर भी वो लड़का खुद को अकेला और बदनसीब महसूस करता था।

वो बच्चा सोचता कि मेरी किस्मत कितनी खराब है कि मैं बच्चों के साथ खेल नहीं सकता,, काश मैं गरीब ही होता, कम से कम कहीं भी घूमने की आजादी तो होती, बच्चों और दोस्तों के साथ मस्ती तो करता।

अब आप ही बताइये कौन से बच्चे की किस्मत अच्छी है और कौन से बच्चे की खराब??…….

दोस्तों दरअसल किस्मत दोनों ही बच्चों की अच्छी है और दोनों की ही खराब है।

सब नजरिये का खेल है। आपको सिर्फ यही समझने की जरुरत है। जो चीज़ हमारे पास नहीं होती अगर हम उसके बारे में सोचें तो हमें अपनी किस्मत बुरी दिखाई देगी और वहीँ अगर हमारे पास जो है उसके बारे में सोचें तो किस्मत अच्छी दिखाई देने लगेगी।

दूसरों से आगे निकलने की होड़ में हम खुद अपनी किस्मत को बुरा मानते चले आते हैं जबकि आप जिस व्यक्ति से आगे निकलना चाहते हैं वो खुद किसी और वजह से अपनी किस्मत को बुरा मान रहा होता है।

एक छोटी चिड़िया तालाब के ऊपर से उड़ रही थी। उसने देखा कि मछली तालाब में तैर रही है बस तभी उसे लगा ये मछली तैर सकती है लेकिन मैं नहीं तैर सकती,, उफ्फ मेरी किस्मत ही खराब है।

बस यही हो रहा है आज कल…आपकी किस्मत आपके नजरिये पर निर्भर करती है। जो चीजें आपके पास नहीं हैं अगर आप हमेशा उनके बारे में सोचेंगे तो जिंदगी भर बदकिस्मत ही बने रहेंगे।

अगर आप हमेशा अपनी बीवी की बुराइयों पर ध्यान देंगे तो पक्का आप यही सोचेंगे मेरी किस्मत ही खराब है जो ऐसी बीवी मिली लेकिन अगर आप हमेशा अपनी बीवी की अच्छाइयों पर ध्यान देंगे तो आपको लगने लगेगा मेरी किस्मत कितनी अच्छी है। ये सिर्फ कहने की बात है, आजमा के देखिये फिर आप खुद जान जायेंगे।

आपकी किस्मत आपके हाथ में है। हर परिस्थिति के दो पहलू होते हैं – सकारात्मक और नकारात्मक,, अगर आप सकारात्मक नजरिये से देखेंगे तो किस्मत अच्छी दिखाई देगी और नकारात्मक नजरिये से देखेंगे तो किस्मत बुरी ही दिखाई देगी।
 

                 - आशुतोष सिंह

Friday, 25 November 2016

पर्यटन (tourism)

नोट रखते हो हज़ारों में
कुछ दिन तो गुज़ारो क़तारों में।

                                         बैंक पर्यटन स्थल

Sunday, 2 October 2016

सत्य और अहिंसा के मार्गदर्शक बापू

::::सत्य और अहिंसा के प्रयाय गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर रियासत के दीवान करमचंद के घर हुआ , ये करमचंद की चौथी पत्नी पुतलीबाई की अंतिम संतान थे ।
इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था । ये अपने बाल्यकाल से सरल और स्वभाविक बालक थे । ये पढ़ने तथा खेलने कूदने मे भी सामान्य थे ।इनकी शादी बाल्यावस्था मे कस्तूरबा गाँधी से हुई , बा स्वभाव से धार्मिक स्त्री थी !इनका अधिकतम समय पूजा पाठ मे बीतता था । गाँधी  वैष्णव धर्म के अनुयायी थे ,जिसमे मांसाहार और मदिरा का वर्जन था ।गाँधी ने जैसे तैसे बम्बई  महाविद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की । और भावनगर स्थित सामलदास कालेज मे दाखिला लिया ।
पारिवारिक परम्परा को निभाने के लिये बरिस्टर करने के लिये इंग्लैण्ड गये और 1888मे वहाँ के चार कानून महाविद्यालय मे से एक इनर टेम्पल मे दाखिला लिया ।
वहाँ उन्होने भगवतगीता को सर एडविन आर्नल्डो के अंग्रेजी अनुवाद मे पढ़ा । परिचित शाकाहारी अंग्रेजों मे एड्वर्ड कारपेन्टर जैसे समाजवादी और मानवतावादी थे जो "ब्रिटिश के थोरो " कहलाते थे । जॉर्ज बर्नाड शा जैसे फबीयान , एनी बेसेंट सरीखे धर्मशास्त्री शामिल थे।
"आप का कोई कार्य महत्वहीन हो सकता है लेकिन महत्वपूर्ण यह है की आप कोई कार्य करे ।"- गाँधी
1891 मे  लंदन से  वापस आये उनकी अनुपस्थिति मे माता का देहांत हो गया था ।
वे अपनी पहली ही बहस मे न्यायलय मे नाकाम रहे , न्यायलय ने उन्हे शिक्षक कार्य के लिये भी अस्वीकृत कार दिया । जिसके बाद ये नडाल स्थित कम्पनी मे एक साल  का अनुबंध स्वीकार कर दक्षिण अफ्रीका गये । डरबन न्यायलय मे यूरोपीय मजिस्ट्रेट ने उन्हे पगडी उतारने के लिये कहा । कुछ दिनो बाद प्रिटोरिया जाते समय इन्हे रेल से बाहर फेंक दिया गया जिससे इन्होने ठण्डी रात ठिठुर कर  स्टेशन पर बितायी ।
1906 मे टानसवाल के खिलाफ गाँधी जी के नेतृत्व मे विरोध जनसभा का आयोजन किय गया । इस अध्यादेश के उलंघन और इसके परिणाम स्वरूप दण्ड  भुगतने की शपथ ली । इस प्रकार सत्याग्रह का जन्म हुआ और इन्होने अफ्रीका मे  टालेस्टाय ,फीनीस्क आश्रम की स्थापना सत्याग्रह के काम को आगे  बढ़ाने के लिये की । और सत्याग्रह 7 वर्षों तक चला ।फिर  ये  1914 जुलाई मे अफ्रीका से विदा लेने  पर एक मित्र स्मट्स ने लिखा  की "संत ने हमारी भूमि से विदा ले ली है , आशा है सदा के लिये । ऐसे व्यक्ति का विरोधी होना मेरी नियत थी । जिनके लिये तब भी मेरे मन मे बहुत  सम्मान  था । बापू अपने अनेक जेल यात्रा  के दौरान इन्होंने स्मट्स के लिये एक जोडी चप्पल तैयार की ।
गाँधी की धार्मिक खोज माता बा और घर के प्रभाव से सुरी हुई और आपने निजी अध्यन से इस निष्कर्ष पर पहुचे की सभी धर्म सत्य हैं फिर भी कोई धर्म पूर्ण नही हैं । क्योंकि कभी कभी इनकी व्याख्या स्तरहीन बुद्धि  संकीर्ण ह्रदय से की गयी हैं ।
भारत मे इन्होंने चम्पारण आन्दोलन से शुरुआत की और सत्याग्रह के लिये इन्होने साबरमती के तट पर सत्याग्रह या साबरमती  आश्रम को स्थापित किया और आन्दोलनों के मार्गदर्शक बने रहे ।
" राम शब्द के उच्चारण से लाखो हिन्दुओं पर फौरन असर होगा और god शब्द समझने से भी उन पर कोई असर नही पड़ेगा । चिरकालीन शब्दो के प्रयोग और उनके उपयोग के साथ संयोजित पवित्रता से शब्दो को शक्ति प्राप्त होती हैं "-गाँधी
" भारत कि सभ्यता की रक्षा के लिये तुलसीदास का चेतनमय  रामचरितमानस के अभाव मे किसानों का जीवन जड़त्व और शुष्क बन जाता है , पता नही क्या कैसे हुआ परंतु यह निर्वाद है कि तुलसीदास कि भाषा मे जो प्राणपाद शक्ति है वह दूसरे भाषा मे नही पायी जाती । श्रीरामचरितमानस विचार -रत्नों का भंडार हैं ।-महात्मा गाँधी  "
फरवरी 1922मे असहयोग आन्दोलन जोर पकड़ता दिखा लेकिन चौरा चौरी काण्ड की वजह से गाँधी जी चिन्तित  थे जिसके कारण सविनय अवज्ञा  आन्दोलन स्थगित करना पड़ा ,10 मार्च 1922 को गाँधी को जेल मे  डाल दिया गया । उनकी अनुपस्थिति मे काँग्रेस दो भागो मे विभाजित  हो गयी ।
द्वितीय गोल मेज सम्मेलन मे गाँधी जी ने कँग्रेस्स का प्रतिनिधि किया और यह सम्मेलन असफल रहा । यही पर वेस्टर्न चर्चिल ने गाँधी को अर्द्ध नंगा फकीर कहा ।
1942 मे भारत छोडो आन्दोलन मे गाँधी जी  ने " करो या मरो  " नारा दिया, हर व्यक्ति को खुली छूट हैं कि वह अहिंसा आचरण को ध्यान मे रखते हुए पूरी जोर लगाये। हड़ताल और डुशरे अहिंसक प्रयोगों से गतिरोध पैदा कर दे । सत्याग्रहियों को मरने लिये , न कि जीवित  रहने के लिये , घर से निकलना होगा उन्हे मौत कि तलाश मे घूमना चाहिए मौत का सामना करना चाहिये ,जब लोग मरने के लिये घर से बाहर निकलेंगे तभी कौम बचेगी , करेंगे या मरेंगे । ----गाँधी
30 जनवरी 1948 को हिंदूकट्टरपंथी गोडसे ने गोली मारकर बिरला भवन मे हत्या  कर दी ।
" हिन्दी लिपि और भाषा जानना हर भारतीय का कर्तव्य हैं ,उस भाषा का स्वरूप  जानने के लिये रामायण जैसी पुस्तक शायद ही होगी ।"-महात्मा गाँधी
"अहिंसा का पुजारी ,
सत्य की राह दिखाने वाला ,
ईमान का पाठ पढ़ा गया हमे ,
वो बापू लाठी वाला "
सामान्य सी कद और काठी ,
प्रबल थी सिद्धान्तों की लाठी.

Friday, 23 September 2016

हिन्दी हमारी मातृ भाषा

⭕हिन्दी और अंग्रेजी मे फर्क⭕

अ- से - अनार.........ज्ञ- से - ज्ञानी
a- से - apple.........z- से - zebra

दोनों भाषा की शुरुआत फल से होती है।
अंत मे हिन्दी आपको ज्ञानी बनाकर छोड़ती है,
और अंग्रेजी जानवर बनाकर.....

अब आप सोचिये की हमारी राष्ट्र भाषा का कितना महत्व है!