Thursday, 25 January 2018

रोमांस और ज़िंदगी

                                      


                                                                   रोमांस और ज़िंदगी


जैसे ही मंडप पर दूल्हा आया था कानाफूसी शुरू हो गयी थी। बेटी से उम्र में कई साल बड़े लड़के को दामाद बना कर ले आये थे मैनेजर साहब। बेटी से भी कुछ पूछा नहीं बस बताया भर था कि शादी तय  कर आये हैं। लड़का बहुत अच्छा है, शरीफ है और कोई व्यसन भी नहीं है। 
मनु ने भी कुछ ख़ास उत्साह या दुःख प्रकट नहीं किया था। जिससे प्रेम करती थी वो अपने माता-पिता के दवाब में आ कर कहीं और शादी कर चूका था। अब मनु के लिए यह विवाह एक रस्म-अदाएगी भर था। शादी हो गयी। ससुराल में तीन दिन रह कर पतिदेव के साथ दिल्ली आ गयी थी मनु। 
जरुरी भर की बातें होती थी। सब्ज़ी में क्या लाना है? घर के लिए कौन से फर्नीचर खरीदने हैं? कहाँ से खरीदना है? बस यही सब। 
रोमांस से परहेज़ दोनों को था। 
वैसे मनु के अंदर रोमांस का कीड़ा कूट-कूट कर भरा था लेकिन मनहूस दिल टूटने के बाद उसने उसे दिल के बक्से में रख लॉक करके चाभी कहीं फेंक दिया था मगर शिवाय का रोमांस से कोई वास्ता नहीं था। सज़्ज़न पुरुष था एकदम। पैंतीस के उम्र में ब्याह हुआ था। उसके पहले सिर्फ पढाई और नौकरी की तैयारी से दिल लगाए थे। तब कहीं जा कर बैंक में पीओ बने थे। 
फिर जब मनु के पिता जी एक बैंक-सेमीनार में उनसे मिले तो मंत्रमुद्ध हो गए और रिश्ते की बात निकाल दिए। फ़ोन में मनु का फोटो था, शिवाय को मनु पहली नज़र में पसंद आ गयी थी लेकिन सज़्ज़न पुरुष होने के नाते उन्होंने अपनी माता जी का नंबर होने वाले ससुर जी को दे दिया। 
वैसे ये बात उन्होंने मनु पर कभी ज़ाहिर नहीं होने दिया था कि मनु उन्हें देखते ही पसंद आ गयी थी या यूँ कह लीजिये शायद प्रेम में पड़ गए थे उसकी उस तस्वीर को देख कर। गलती वैसे शिवाय की भी नहीं थी। प्रेम से कभी पाला नहीं पड़ा था, तो समझ भी क्या ख़ाक आने वाला था। 
ख़ैर, ज़िंदगी चल रही थी। रोज वही बैंक जाना, लौटते हुए सब्ज़ी-दूध और फल ले कर आना। वीकेंड पर घर के लिए पर्दे, तो कभी आलमीरा और कभी बाल्टी ख़रीद लाना। अब सर्दी काफी बढ़ गयी थी। सर्दी वो भी दिसंबर की। 
लगभग रोज बैंक से आने के बाद, अपनी सर्दी, तो कभी कन्धा दर्द, तो कभी कमर दर्द की शिकायत ले कर बैठ जाते थे। मनु तो अंदर तक भून जाती थी। कैसे बुढऊ से पाला पर गया था। पापा पर गुस्सा भी आता मगर शिवाय उसे कोई तकलीफ भी तो नहीं देता था जिसका ज़िक्र करके वो पापा से लड़ सके। 
रात को दोनों बैठे न्यूज़ देख रहे थे। समाचार-वाचक ने बताया कल दिल्ली में बारिश होगी। 
मनु के अंदर का रोमांस का कीड़ा अचानक से जाग गया। चहकते हुए बोली, "wow!! दिसंबर में बारिश! How romantic!!"
शिवाय का तुरंत रिएक्शन आया, "ओह! ये बारिश!! इतनी ठंढ में कुल्फ़ी जम जाएगी बैंक से लौटते हुए। ऊपर से सर्दियों में मेरे कंधे का दर्द और बढ़ जाता है। कल आते हुए दवाई ले लूंगा।"
मनु के जी में आया सामने जल रहा ब्लोअर दे मारे दीवार पर, नहीं इस बुढऊ के सर पर मगर मन मसोड़ कर रह गयी। 
अगले दिन सुबह जब आँख खुली सारा दिल्ली कोहरे में ढंका हुआ दिखा। घर के पीछे वाले अशोक के पेड़ से बारिश के बूंदों की गिरने की आवाज़ें आ रही थी, टप-टप करके। मचलते हुए मनु ने खिड़की खोल दिया। मानों वो सर्द हवाएं उसे चूमने को बेक़रार खिड़की खुलने का ही इंतज़ार कर रही थी। 
मनु ने बाहें फ़ैला कर हवा को अपनी आग़ोश में भर लेना चाहा। 
"ओह!क्या कर रही हो? खिड़की क्यों खोल दिया यार?सारा शीत कमरे में भर गया। बंद कर दो तुरंत।" शिवाय बाथरूम में घुसते हुए बोला। 
मनु की आँखों में आंसू आ गए। चुपचाप रसोई में जा कर नाश्ता बनाने लगी। शिवाय तैयार हो कर, कोई चार स्वेटर पहन कर बैंक चला गया। पुरे दिन मनु रोती रही और कभी अपनी किस्मत, तो कभी पापा, तो कभी अपने उस मनहूस बॉयफ्रेंड कोसती रही। 
शाम को डोरबेल बजी। मुँह पोंछ कर दरवाज़ा खोलने आयी। शिवाय हाथों में कई ग़ुलाब और आइसक्रीम का डिब्बा लिए खड़ा दिखा। और वो भी शाहरुख़ खान के स्टाइल में बाहें फैलाये। बदन पर सिर्फ शर्ट और एक जैकेट भर था। 
मनु हकीबकी रह गयी। 
"चलिए जल्दी अंदर चलिए। नहीं तो दर्द बढ़ जायेगा तो फिर मेरी ही शामत आएगी। पूरी रात मुझ से मालिश नहीं हो पायेगा।"
"अरे जानेमन! कोई दर्द नहीं होगा और जो हुआ तो इलाज़ तुम हो न।" कहते हुए इसे बाँहों में भर लिया। 
मनु अगले ही पल अपनी नाक उसके होंठों के पास लाते हुए बोली,"पी कर आये हैं आप। पापा ने तो कहा था कि आप नशा नहीं करते हैं।"
"नशा के पीना जरुरी नहीं है बीवी। तुम अपने आप में एक नशा हो।" मनु बेहोश होते-होते बची। मारे शर्म के उसकी ऑंखें झुकी जा रही थी। शिवाय उसे बाँहों में लिए अब सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगा। उसे मनु के साथ छत पर बैठ कर इस गिरते शीत में भींगते हुए आइसक्रीम जो खाना था.



-सोशल मीडिया से। 

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