Monday, 31 October 2022

'मैं' जब 'हम' हो जावे ; 'आप' जब 'तुम' हो जावे।

'मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।
कोरी शून्य कल्पना का, 
चक्र टूट फिर जावे। 
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।
मन शान्ति हो जावे, 
काया रंग फिर पावे। 
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे। 
भाव और विचारों में, 
अपना-पन झलकावे। 
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।
घिरे मनो के फेरो से, 
अकेलापन मिट जावे। 
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।
बिगड़े संबंध, टूटे-नाते, 
फिर इक हो जावे।  
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।
क्षमा, दया, करुणा, प्रेम, 
जन्म यहि से पावे। 
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।
जमी धूल की परतों से, 
अवगुण धूल जावे। 
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।
दम्भ दूर हो जावे, 
अपूर्ण पूर्ण हो जावे। 
मैं' जब 'हम' हो जावे, 
'आप' जब 'तुम' हो जावे।

-आशुतोष सिंह चौहान 




1 comment:

  1. What a wonderful art; And also a mode of expression of positive approach.

    😎👏👏👏👏

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