Thursday, 13 March 2025

प्रेम - पर्व :- होली

होलिका की ज्योति में, मिटे मनों के भार,

जलें विकार-अहं सभी, शुभ हो नए विचार।

रंग बरसे आसमाँ से, प्रीत भरे पैगाम,

हँसी-मजाक की बौछारें, छू लें हर इक धाम॥


अंग-अंग रंगीन हो, थिरके मन बेध्यान,

स्नेह सुधा की धार में, बहें पुराने मान।

फागुन की इस मस्ती में, घुली मिठास अपार,

गले मिले हर हृदय 4444 4444 r4 4|t4, नेह बने आधार॥

आओ रंगों में घुले, स्नेह-सुरभि के भाव,

प्रेम पिएं इस होली

पर, मिटे सभी दुराव।

नव उमंग, नव गीत हों, छूटे मन के बंध,

रंगों संग66 उड़ जाएं सब, कलुष, द्वेष और क्रंद॥

No comments:

Post a Comment