होलिका की ज्योति में, मिटे मनों के भार,
जलें विकार-अहं सभी, शुभ हो नए विचार।
रंग बरसे आसमाँ से, प्रीत भरे पैगाम,
हँसी-मजाक की बौछारें, छू लें हर इक धाम॥
अंग-अंग रंगीन हो, थिरके मन बेध्यान,
स्नेह सुधा की धार में, बहें पुराने मान।
फागुन की इस मस्ती में, घुली मिठास अपार,
गले मिले हर हृदय 4444 4444 r4 4|t4, नेह बने आधार॥
आओ रंगों में घुले, स्नेह-सुरभि के भाव,
प्रेम पिएं इस होली
पर, मिटे सभी दुराव।नव उमंग, नव गीत हों, छूटे मन के बंध,
रंगों संग66 उड़ जाएं सब, कलुष, द्वेष और क्रंद॥
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