Tuesday, 27 February 2018

जल प्रदूषण (Water pollution)

                      जल प्रदूषण

जल प्रदूषण जल निकायों के  प्रदूषित  (जैसे झीलों, नदियों, समुद्रों, जलवाही स्तर और भूजल) होने को  कहते  हैं | पर्यावरण की दुर्दशा का ये रूप तब होता है जब प्रदूषकों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बिना शोधन किए हानिकारक यौगिकों को जल निकायों में छोड़ दिया जाता है |

जल प्रदूषण के प्रकार:

प्रदूषण के प्रकारों का मुख्य केंद्र  : जब प्रदूषण के स्रोतों का आसानी से पता लग जाता है क्यूंकि इसका एक निश्चित स्रोत व स्थान होता है  तथा जब ये जल में मिल जाता है उसे केंद्र स्रोत कहा जाता है उदाहरण के लिए  नगर निगम और औद्योगिक निर्वहन की नालियाँ | जब प्रदूषण के  स्रोतों का  आसानी से पता नहीं लग पाता है जैसे की  कृषि अपवाह, अम्ल वर्षा  आदि, प्रदूषण के आंतरिक स्रोत है |

जल प्रदूषण के कारण:

आम जल प्रदूषण के कई वर्ग हैं। ये बीमारी पैदा करने के घटक हैं (रोगजनक )जिसमे  बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ तथा परजीवी कीड़े शामिल हैं, जो जल में घरेलू सीवेज और अशोधित मानव व पशुओं के अपशिष्ट द्वारा प्रवेश कर जाते हैं | मानव अपशिष्ट में कोलिफोर्म बैक्टीरिया नामक हानिकारक बैक्टीरिया की काफी संख्या होती है जैसे इशरीकिया कोली और  स्ट्रेप्टोकोकस फ़ैकलिस । ये  जीवाणु सामान्य रूप से मानव की बड़ी आंत में बढ़ते हैं जहां ये  कुछ खाना पचाने  के लिए और विटामिन K  के उत्पादन के लिए जिम्मेदार होते हैं । जल में बड़ी मात्रा में मानव अपशिष्ट के मिल जाने से इन जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है जो जठरांत्र रोगों का कारण बनती है । जल प्रदूषण की एक अन्य श्रेणी में  ऑक्सीजन से क्षीण अपशिष्ट आता है । इसे जैविक अपशिष्ट कहा जाता है जिसे ऑक्सीज़नजीवी बैक्टीरिया से गलाया जाता है | जल में मौजूद ऑक्सीज़न को बड़ी संख्या में बैक्टीरिया, अपशिष्ट को गलाने के लिए प्रयोग करते हैं | इस प्रक्रिया में  पानी की गुणवत्ता में कमी आ जाती है । ऑक्सीजन की वह मात्रा जिससे जैविक तत्व की एक निश्चित मात्रा को गलाया जाये उसे जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD ) कहा जाता है |  पानी में बीओडी की मात्रा प्रदूषण के स्तर का सूचक होती  है।

प्रदूषण के एक तृतीय  वर्ग में  अकार्बनिक संयंत्र पोषक तत्व आते है। ये पानी में घुलनशील नाइट्रेट व फॉस्फेट  हैं जो शैवाल व अन्य जलीय पौधों की अत्यधिक वृद्धि का कारण होते है | पोषक तत्वों के मिलने की वजह से पैदा हुए  अत्यधिक शैवाल और जलीय पौधों की प्रक्रिया को सुपोषण कहते हैं | ये जल की उपयोगिता में पानी की सेवन की नालियों में अवरुद्ध उत्पन्न कर के, जल के स्वाद व गंध में बदलाव करते हैं और कार्बनिक तत्वों के बनने का कारण बनती हैं |

जबकि अतिरिक्त उर्वरक सुपोषणी   पैदा करते हैं,  कीटनाशकों के कारण जैव संचयन  व जैव आवर्धन होता है ।  जो कीटनाशक जल में घुल जाते हैं  वे खाद्य श्रृंखला में समाविष्ट हो जाते हैं | इसके बाद इन्हें पादपप्लवक और जलीय पौधों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है । इन पौधों को शाकाहारी मछलियों द्वारा खाया जाता है जिन्हें  बाद में मांसाहारी मछलियों खाती हैं  और अंत में इन्हें पक्षी खाते हैं | खाद्य श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी में जो रसायन शरीर से बाहर नहीं निकलते वे तेज़ी से संचित होते हैं व बढ़ते हैं जिसके परिणामस्वरूप हानिकारक पदार्थों में जैव आवर्धन होता है |

ऐसे कीटनाशक जैसे DDT  के उच्च स्तर के संचय के प्रभाव से पक्षी  सामान्य से ज्यादा पतले खोल के अंडे देते हैं । इसके परिणामस्वरूप अंडे समय से पहले टूट जाते हैं व चूजे (मुर्गी का बच्चा ) अंदर ही मर जाते हैं |

जल प्रदूषण के चौथे वर्ग में जलीय घुलनशील अकार्बनिक रसायन आते हैं,जिसमे अम्ल, लवण, व विषाक्त धातुओं के यौगिक पारा और सीसा होते हैं | इन रसायनों के उच्च स्तर होने से पानी पीने योग्य व मछ्ली तथा अन्य जलीय जीवन के योग्य नहीं रहता, फसलों की पैदावार कम हो जाती है, और इस पानी के उपयोग से उपकरणों में तेज़ी से जंग लग सकता है |

जल प्रदूषण का एक अन्य कारण विभिन्न प्रकार के कार्बनिक रसायन हैं जिसमें  तेल, पेट्रोल, प्लास्टिक, कीटनाशक, सफाई करने वाले घोल,डिटर्जेंट और अन्य कई रसायन शामिल हैं | ये जलीय जीवन और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं ।

जल प्रदूषण के अन्य वर्ग में तलछट में  रुके हुए पदार्थ आते हैं । ये मिट्टी के अघुलनशील कण व अन्य ठोस होते है जो जल में एक ही स्थान पर ठहर जाते हैं ।  यह तब होता है जब  भूमि से मिट्टी बह जाती है ।जल में रुके हुए काफी  मात्रा में   मिट्टी के कण सूरज की  रोशनी को पहुँचने में रुकावट पैदा करते हैं । यह जलीय पौधों  के संश्लेषण को कम कर देते हैं तथा जलीय पौधों और शैवाल जलीय निकायों के पारिस्थितिक संतुलन में खलल डालते हैं |

पानी में घुलनशील रेडियोधर्मी आइसोटोप  जल प्रदूषण का एक अन्य स्रोत हैं । ये  विभिन्न ऊतकों और अंगों में संकेंद्रित होते हैं जो खाद्य क्षृंखला  और खाद्य जाल के माध्यम से गुजरती हैं। ऐसे आइसोटोप द्वारा उत्सर्जित विकिरण जन्म दोष, कैंसर और आनुवंशिक क्षति का कारण बन सकते हैं ।

बिजली संयंत्रों द्वारा छोड़ा गया गरम पानी और उद्योगों द्वारा जल को  ठंडा करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग स्थानीय जल स्रोतों के तापमान को बढ़ा देती है | थर्मल प्रदूषण तब होता है जब उद्योग जल स्रोतों में गरम पानी छोड़ते हैं |

सड़कों  और पार्किंग में खड़े वाहनों से बहा तेल सतह के पानी में मिल जाता है जिससे भूजल प्रदूषण होता है | भूमिगत टैंक से रिसाव भी जल प्रदूषण का एक अन्य स्रोत है। समुद्रों में परिवहन टैंकरों से दुर्घटनावश बहे तेल महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षति का कारण बन रहे हैं ।

दूषित भूजल से आर्सेनिक विषाक्तता के गंभीर मामले पश्चिम बंगाल में सामने आए हैं  जिसे आज तक की भूजल प्रदूषण की सबसे खराब स्थिति माना जाता है ।  आर्सेनिक विषाक्तता  दो से पाँच साल तक आर्सेनिन युक्त पानी की मात्रा पीने से व पानी में आर्सेनिक के घुले होने से विकसित होती है |

शुरू में त्वचा काली ( काला  कैंसर फैलना ) होना शुरू होती है जिसेसे बाद में छाती , पीठ और हाथ-पैर, की त्वचा पर काले धब्बे दिखना शुरू हो जाते हैं | बाद की अवस्था में त्वचा का काला कैंसर   हो जाता है और शरीर पर काले व सफ़ेद धब्बे दिखना शुरू हो जाते हैं| आर्सेनिक विषाक्तता  के मध्य चरण में त्वचा के कुछ भाग कठिन और रेशेदार हो जाते हैं । हाथ की त्वचा पर गांठों या पैर के तलवों पर पिंड के साथ  शुष्क त्वचा गंभीर विषाक्तता का संकेत करती है ।इससे  गेंगरीन और कैंसर जैसी बीमारियाँ हो जाती हैं | यह अवसाद और कैंसर के गठन के लिए जिम्मेदार  हो सकते हैं। आर्सेनिक विषाक्तता अन्य जटिलताओं को भी अपने साथ लाती हैं जैसे ऐसी यकृत और प्लीहा वृद्धि, जिगर का सिरोसिस,  मधुमेह, गण्डमाला और त्वचा का  कैंसर /

जल प्रदूषण को रोकने के लिए उपाय:

सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बचाव की है,  उपचार संयंत्रों की स्थापना करना और अपशिष्ट पदार्थों का निदान करना, इन सबके द्वारा पानी में प्रदूषण को घटाया जा सकता है | उपचारित जल को पुनः जहां भी संभव हो, बागवानी के लिए  उपयोग किया जा सकता है | कुछ साल पहले थरमेक्स  द्वारा  रूट जोन  नामक नई तकनीक का विकास हुआ| इस प्रणाली के माध्यम से दूषित पानी को   विशेष रूप से बनाए गए गन्ने की खोई (रीड बेड्स) के  जड़  से प्रवाह किया जाता है । गन्ने की खोई (रीड बेड्स) जो कि विशेषकर  आर्द्रभूमि पौधे हैं, इनमे आसपास की वायु से रंध्र उद्घाटन से  ऑक्सीजन को अवशोषित करने की क्षमता होती है | ऑक्सीजन ईख के बिस्तर के छिद्रयुक्त तने से खोखली जड़ों में पहुँच जाती है जहां ये जड़ कटिबन्ध क्षेत्र में प्रवेश करती है और कई जीवाणुओं और कवक के विकास के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ बनाते हैं |  ये  सूक्ष्म जीव  अपशिष्ट जल में अशुद्धियों को ओक्सिडाइज़ कर देता है ,जिससे अंत में जो पानी बाहर आए वे साफ हो |

आशुतोष सिंह

Thursday, 25 January 2018

रोमांस और ज़िंदगी

                                      


                                                                   रोमांस और ज़िंदगी


जैसे ही मंडप पर दूल्हा आया था कानाफूसी शुरू हो गयी थी। बेटी से उम्र में कई साल बड़े लड़के को दामाद बना कर ले आये थे मैनेजर साहब। बेटी से भी कुछ पूछा नहीं बस बताया भर था कि शादी तय  कर आये हैं। लड़का बहुत अच्छा है, शरीफ है और कोई व्यसन भी नहीं है। 
मनु ने भी कुछ ख़ास उत्साह या दुःख प्रकट नहीं किया था। जिससे प्रेम करती थी वो अपने माता-पिता के दवाब में आ कर कहीं और शादी कर चूका था। अब मनु के लिए यह विवाह एक रस्म-अदाएगी भर था। शादी हो गयी। ससुराल में तीन दिन रह कर पतिदेव के साथ दिल्ली आ गयी थी मनु। 
जरुरी भर की बातें होती थी। सब्ज़ी में क्या लाना है? घर के लिए कौन से फर्नीचर खरीदने हैं? कहाँ से खरीदना है? बस यही सब। 
रोमांस से परहेज़ दोनों को था। 
वैसे मनु के अंदर रोमांस का कीड़ा कूट-कूट कर भरा था लेकिन मनहूस दिल टूटने के बाद उसने उसे दिल के बक्से में रख लॉक करके चाभी कहीं फेंक दिया था मगर शिवाय का रोमांस से कोई वास्ता नहीं था। सज़्ज़न पुरुष था एकदम। पैंतीस के उम्र में ब्याह हुआ था। उसके पहले सिर्फ पढाई और नौकरी की तैयारी से दिल लगाए थे। तब कहीं जा कर बैंक में पीओ बने थे। 
फिर जब मनु के पिता जी एक बैंक-सेमीनार में उनसे मिले तो मंत्रमुद्ध हो गए और रिश्ते की बात निकाल दिए। फ़ोन में मनु का फोटो था, शिवाय को मनु पहली नज़र में पसंद आ गयी थी लेकिन सज़्ज़न पुरुष होने के नाते उन्होंने अपनी माता जी का नंबर होने वाले ससुर जी को दे दिया। 
वैसे ये बात उन्होंने मनु पर कभी ज़ाहिर नहीं होने दिया था कि मनु उन्हें देखते ही पसंद आ गयी थी या यूँ कह लीजिये शायद प्रेम में पड़ गए थे उसकी उस तस्वीर को देख कर। गलती वैसे शिवाय की भी नहीं थी। प्रेम से कभी पाला नहीं पड़ा था, तो समझ भी क्या ख़ाक आने वाला था। 
ख़ैर, ज़िंदगी चल रही थी। रोज वही बैंक जाना, लौटते हुए सब्ज़ी-दूध और फल ले कर आना। वीकेंड पर घर के लिए पर्दे, तो कभी आलमीरा और कभी बाल्टी ख़रीद लाना। अब सर्दी काफी बढ़ गयी थी। सर्दी वो भी दिसंबर की। 
लगभग रोज बैंक से आने के बाद, अपनी सर्दी, तो कभी कन्धा दर्द, तो कभी कमर दर्द की शिकायत ले कर बैठ जाते थे। मनु तो अंदर तक भून जाती थी। कैसे बुढऊ से पाला पर गया था। पापा पर गुस्सा भी आता मगर शिवाय उसे कोई तकलीफ भी तो नहीं देता था जिसका ज़िक्र करके वो पापा से लड़ सके। 
रात को दोनों बैठे न्यूज़ देख रहे थे। समाचार-वाचक ने बताया कल दिल्ली में बारिश होगी। 
मनु के अंदर का रोमांस का कीड़ा अचानक से जाग गया। चहकते हुए बोली, "wow!! दिसंबर में बारिश! How romantic!!"
शिवाय का तुरंत रिएक्शन आया, "ओह! ये बारिश!! इतनी ठंढ में कुल्फ़ी जम जाएगी बैंक से लौटते हुए। ऊपर से सर्दियों में मेरे कंधे का दर्द और बढ़ जाता है। कल आते हुए दवाई ले लूंगा।"
मनु के जी में आया सामने जल रहा ब्लोअर दे मारे दीवार पर, नहीं इस बुढऊ के सर पर मगर मन मसोड़ कर रह गयी। 
अगले दिन सुबह जब आँख खुली सारा दिल्ली कोहरे में ढंका हुआ दिखा। घर के पीछे वाले अशोक के पेड़ से बारिश के बूंदों की गिरने की आवाज़ें आ रही थी, टप-टप करके। मचलते हुए मनु ने खिड़की खोल दिया। मानों वो सर्द हवाएं उसे चूमने को बेक़रार खिड़की खुलने का ही इंतज़ार कर रही थी। 
मनु ने बाहें फ़ैला कर हवा को अपनी आग़ोश में भर लेना चाहा। 
"ओह!क्या कर रही हो? खिड़की क्यों खोल दिया यार?सारा शीत कमरे में भर गया। बंद कर दो तुरंत।" शिवाय बाथरूम में घुसते हुए बोला। 
मनु की आँखों में आंसू आ गए। चुपचाप रसोई में जा कर नाश्ता बनाने लगी। शिवाय तैयार हो कर, कोई चार स्वेटर पहन कर बैंक चला गया। पुरे दिन मनु रोती रही और कभी अपनी किस्मत, तो कभी पापा, तो कभी अपने उस मनहूस बॉयफ्रेंड कोसती रही। 
शाम को डोरबेल बजी। मुँह पोंछ कर दरवाज़ा खोलने आयी। शिवाय हाथों में कई ग़ुलाब और आइसक्रीम का डिब्बा लिए खड़ा दिखा। और वो भी शाहरुख़ खान के स्टाइल में बाहें फैलाये। बदन पर सिर्फ शर्ट और एक जैकेट भर था। 
मनु हकीबकी रह गयी। 
"चलिए जल्दी अंदर चलिए। नहीं तो दर्द बढ़ जायेगा तो फिर मेरी ही शामत आएगी। पूरी रात मुझ से मालिश नहीं हो पायेगा।"
"अरे जानेमन! कोई दर्द नहीं होगा और जो हुआ तो इलाज़ तुम हो न।" कहते हुए इसे बाँहों में भर लिया। 
मनु अगले ही पल अपनी नाक उसके होंठों के पास लाते हुए बोली,"पी कर आये हैं आप। पापा ने तो कहा था कि आप नशा नहीं करते हैं।"
"नशा के पीना जरुरी नहीं है बीवी। तुम अपने आप में एक नशा हो।" मनु बेहोश होते-होते बची। मारे शर्म के उसकी ऑंखें झुकी जा रही थी। शिवाय उसे बाँहों में लिए अब सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगा। उसे मनु के साथ छत पर बैठ कर इस गिरते शीत में भींगते हुए आइसक्रीम जो खाना था.



-सोशल मीडिया से। 

Sunday, 3 December 2017

जीवन का आइना 1 : विश्वास और प्रोत्साहन

      जीवन का आइना 1 :विश्वास और प्रोत्साहन

जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को  अलग तरह से करते हैं.।

जीतने वाले लाभ देखते हैं, हारने वाले नुकसान ।

"यदि आपको लगता है कि आप कर सकते हैं - तो आप कर सकते हैं! अगर आपको लगता है कि आप नहीं कर सकते - तो आप नहीं कर सकते दोनों ही सूरतों में आप सही हैं ।

विपरीत परिस्थितियों में कुछ लोग टूट जाते हैं , तो कुछ लोग लोग रिकॉर्ड तोड़ते हैं।

विजेता बोलते हैं की " मुझे कुछ करना चाहिए " हारने वाले बोलते हैं की " कुछ होना चाहिए "।

चरित्र का निर्माण तब नहीं शुरू होता जब बच्चा  पैदा होता है; ये बच्चे के पैदा होने के  सौ  साल पहले से शुरू हो जाता है|

सत्य का क्रियान्वन ही न्याय है।

जो  भी उधार लें उसे समय पर चूका दें क्यूंकि इससे आपकी  विश्वसनीयता बढती है|


एक देश नारे लगाने से महान नहीं बन जाता।

किसी डिग्री का ना होने दरअसल फायेदेमंद है. अगर आप इंजिनियर या डाक्टर हैं तब आप एक ही काम कर सकते हैं.पर यदि आपके पास कोई डिग्री नहीं है , तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

हमारी बिजनेस से सम्बंधित समस्याएं नहीं होतीं, हमारी लोगों से सम्बंधित समस्याएं होती हैं।

अगर हम हल का हिस्सा नहीं हैं, तो हम समस्या हैं।

लोगों से साथ विनम्र होना सीखे| महत्वपूर्ण होना जरुरी है लेकिन अच्छा होना ज्यादा महत्वपूर्ण है |

कभी भी दुष्ट लोगों की सक्रियता समाज को बर्वाद नहीं करती, बल्कि हमेशा अच्छे लोगों की निष्क्रियता समाज को बर्वाद करती है।

आपने मित्रों को सावधानी से चुने | हमारे व्यक्तित्व की झलक न सिर्फ हमारे संगत से झलकती है बल्कि, जिन संगतों से हम दूर रहते हैं उससे भी झलकती है |

जब कभी कोई व्यक्ति कहता है कि वो ये  नहीं कर सकता है , तो असल में वो दो चीजें कह रहा होता है. या तो मुझे पता नहीं है कि ये कैसे होगा या मैं इसे करना नहीं चाहता।

इन्स्पीरेशन  सोच  है जबकि मोटीवेशन कार्रवाई है।

आत्म-सम्मान और अहंकार का उल्टा सम्बन्ध है।

लोग इसकी परवाह नहीं करते हैं कि आप कितना जानते हैं, वो ये जानना चाहते हैं कि आप कितना ख़याल रखते हैं.

किसी को धोखा न दें क्यूंकि ये आदत बन जाती है , और फिर आदत से व्यक्तित्व |

अच्छे लीडर्स और लीडर्स बनाने की चेष्ठा करते हैं, बुरे लीडर्स और फालोवर्स बनाने की चेष्ठा करते हैं।

हारने वाले लोग भाग्‍य में विश्‍वास करते हैं, हिम्‍मती और पक्‍के इरादें वाले वजह और उसके नतीजों में विश्‍वास करते हैं।

सक्रिय रूप से राह दिखाने करने वाले अच्‍छे नेता होते हैं, और सक्रिय रूप से गलत राह दिखाने वाले बुरे नेता होते हैं।

अगर एक बच्‍चा गलत रास्‍ते पर चला जाता है तो इसके लिए वह बच्‍चा दोषी नहीं है, बल्कि इसके लिए उसके माता-पिता जिम्‍मेदार है।

कभी भी दुष्‍ट लोगों की सक्रियता समाज को बर्बाद नहीं करती, बल्कि हमेंशा अच्‍छे लोगों की निष्क्रियता समाज को बर्बाद करती है।

पैसा लोगों के जीवन में फर्क लाने के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण टूल है।

वे लोग जो भविष्‍य में बहुत आगे जाना चाहते हैं उनमें सफल होने के लिए दो योग्‍यता होनी चाहिए, पहली, लोगों के साथ कुशल व्यवहार करने की और दूसरी, लोगों को कुछ बेचने की।

बहुत सी चीजें एक बच्‍चे की परवरिश पर निर्भर करती है।

मेरा पहला उद्देश्‍य है निवेश करना और इसके अतिरिक्‍त भी कुछ बच जाता है तो उसे खर्च करना।

अच्छे लीडर्स, हमेंशा अधिक से अधिक अच्‍छे लीडर्स बनाने के बारे में सोचते हैं, और बुरे लीडर्स, हमेंशा अधिक से अधिक अनुयायी बनाने के बारे में सोचते हैं।

जीतने वाले लाभ देखते हैं, हारने वाले दर्द।

जो लोग जीतते हैं वह कोई अलग चीजों को अंजाम नहीं देते, बल्कि वो आम चीजों को खास अंदाज में पूरा करते हैं।

एक बेवकूफ बिना सोचे समझे बोलता है और एक बुद्धिमान सोच समझ कर ।

साकारात्मक सोच के साथ साकारात्मक कार्यों का परिणाम सफलता है।

किसी भी प्रोडक्ट को बेचने के लिए 90% दृढ़ विश्वास जबकि 10% प्रोत्‍साहन होना चाहिए।

लम्बी अवधि के निवेश  में आपको हर दिन के मैनेजमेंट की जरुरत नहीं होती है।

जब कभी भी कोई व्‍यक्ति कहता है कि वो ये नहीं कर सकता है, तो असल में वो दो चीजे कर रहा होता है, या तो मुझे पता नहीं है कि ये कैसे होगा, या मैं इसे करना नहीं चाहता।

छोटे लोग दूसरों के बारें में बाते करते हैं, बीच के लोग चीजों के बारे में बात करते हैं और महान लोग सुझाव के बारे में।

सफलता सिर्फ एक संजोग नहीं है यह हमारे नजरिए का नतीजा हैं और अपना नजरिया हम खुद चुन सकते हैं।

किसी डिग्री का ना होना दरअसल फायदेमंद हैं क्‍योंकि अगर आप इंजिनियर या डॉक्टर हैं, तो आप एक ही काम कर सकते हैं, लेकिन आपके पास कोई डिग्री नहीं हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

मैं लोगों का उत्‍साह बढ़ाने को अपनी योग्यता मानता हूँ और वही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है। यही एक महत्‍वपूर्ण रास्‍ता है जिससे किसी इंसान की अच्‍छाई उभारी जा सकती है।

कुदरत बड़ी समझदार और मेहरबान है क्‍योंकि उसने आदमी को सोचने की क्षमता का सबसे बड़ा तोहफा दिया है, लेकिन अफसोस की बात है कि बहुत कम ही लोग इस महान तोहफे का पूरा इस्‍तेमाल कर पाते हैं।

आप जितनी बहसें जीतते है उतने मित्रों को खो देते हैं।

जो करना जरूरी है उसे पसंद करो।

अच्‍छे माहौल में एक मामूली कर्मचारी की भी काम करने की शक्ति बढ़ जाती है जबकि खराब माहौल में एक अच्‍छे कर्मचारी की भी कुशलता कम हो जाती है।

जिस तरह कोई व्‍यक्ति डिक्शनरी के ऊपर बैठने से शब्द और स्पेलिंग नहीं सीख सकता, उसी तरह कोई भी व्‍यक्ति कठिन परिश्रम के बिना अपनी काम करने की शक्ति नहीं बढ़ा सकता।

अपना एक विजन होना चाहिए- यह अदृश्‍य को देखने की काबिलियत है। अगर आप अदृश्‍य को देख सकते हैं तो आप असंभव को भी संभव कर सकते हैं।

प्रेरणा एक आग की तरह है, जिसे जलाए रखने के लिए इसमें लगातार ईंधन डालना पड़ता है। प्रेरणा को बनाए रखने के लिए आपका ईंधन “स्वंय पर विश्वास” ही है।

असफल होना कोई गुनाह नहीं है लेकिन सफलता  के लिए कोशिश न करना जरूर गुनाह है।

जीवन में ऊपर उठते समय लोगों से अदब से पेश आए, क्‍योंकि नीचे गिरते समय आप इन लोगों से दोबारा मिलेंगे।

अनजान होना शर्म की बात नहीं है लेकिन सीखने की इच्‍छा न होना शर्म की बात है।

दुनिया हमें वैसी नहीं दिखती जैसी वह है, बल्कि वैसी दिखती है, जैसे हम हैं।

बिना कठिन परिश्रम के सफलता नहीं मिल सकती, कुदरत चिड़ि‍यों को खाना जरूर देती है, लेकिन उनके घोंसले में नहीं डालती।

अपने घटिया नजरिए का एहसास हो जाने पर भी हम उसे बदलते क्‍यों नहीं?

हिम्‍मत का मतलब डर का न होना नहीं है, हिम्‍मत का मतलब तो डर पर काबू पाना है।

किसी को धोखा न दें क्‍योंकि ये आदत बन जाती है , और फिर आदत से व्यक्तित्व।

विजेता बोलते हैं कि “मुझे कुछ करना चाहिए”, हारने वाले बोलते हैं कि “कुछ होना चाहिए”।

सत्य का क्रियान्वन ही न्याय है।

जो भी उधार लें उसे समय पर चूका दें क्‍योंकि इससे आपकी विश्वसनीयता बढ़ती है।

Monday, 2 October 2017

#2october

क्या बात है इन खंडरो में,
जो इन पर निगाहे टिकती है.
कुछ स्मृतियां हैं,उन वीर जवानों की
जिन्होने देश के मान में,जान गवा दी हैं.

-आशुतोष सिंह

Sunday, 27 August 2017

आखिरी काम

एक बूढ़ा बढ़ई अपने काम के प्रति निष्ठावान और सज्जन व्यक्ति था। उसकी बनाई वस्तु देखने लायक होती थी, वह ठेकेदार के साथ मिलकर ठेके पर वस्तुओं का निर्माण करता उसकी बनी वस्तुएं दिखने में सुंदर, शोभायमान और मजबूत होती। उसकी कलात्मक रुचि वस्तुओं पर झलकती थी उसके जैसा कोई दूसरा कामगार नहीं था। एक से बढ़कर एक नई कलात्मक रूप रेखा से परिपूर्ण वस्तुओं का निर्माण करता था। काम करते करते वह वृद्ध हो चला था। वह बीमार रहता था और उसे घर की चिंता लगी रहती थी। वह एक दिन अपने ठेकेदार से घर जाने की बात कही  तो  ठेकेदार ने उसे पैसे देकर एक सुसज्जित घर बनाने को कहा उसने कहा कि वह काम पूरा करके तुम जा सकते हो, बढ़ाई घर जाने को जानकर अपने काम को इतनी जल्दी और हडबडी में पूरा करने लगा कि उसकी यह रचना उसकी जिंदगी की सबसे बेकार कलात्मक क्रिया थी जैसे तैसे उसने काम को पूरा किया और काम पूरा करने के बाद वहां ठेकेदार के पास गया तो ठेकेदार ने उसे यह  नया घर रहने के लिए तोहफे में दिया। बढ़ाई  सोच कर परेशान था कि मैंने आज तक सभी के लिए कितने अच्छे सुंदर और शोभायमान कलाकृतियों का निर्माण किया अपने लिए बनाए गए घर को इतना बदसूरत निर्मित किया व्यक्ति का काम ही उसकी पहचान होती है व्यक्ति को प्रत्येक निष्ठा से करनी चाहिए,  क्योंकि पता नहीं कौन सा काम आखरी काम हो।

-आशुतोष सिंह

Saturday, 29 July 2017

नम भूमि : "संरक्षण एवं महत्व"

नम भूमि
नम भूमि एक विशिष्ट प्रकार का पारिस्थितिकी तंत्र है जहां का स्तर सामान्य जमीन के बराबर या जमीन उसने पानी से ढकी हुई होती है।
* झील, तालाब, जलाशय, पोखर, दलदली क्षेत्र  इत्यादि भी नम भूमि के अंतर्गत आते हैं यहां तक की नदियों को भी नम भूमि कहा जाता है।
* नम भूमि अत्यंत उत्पादन जलीय परिस्थितिकी तंत्र है तथा समस्त प्रकार की जैव विविधता को बनाए रखता है।

नम भूमि का महत्व
1. नम भूमि को बायोलॉजिकल सुपर मार्केट कहा जाता है क्योंकि यह विस्तृत भोज्य जाल उत्पन्न करते हैं तथा जैव विविधता को समृद्ध बनाए रखते हैं।
2. नम भूमि प्रत्यक्ष रुप से लोगों की जीवन का महत्वपूर्ण अंग है जो लोग नम भूमि क्षेत्र के आस पास रहते हैं वह सिंचाई व पीने योग्य पानी नम भूमि से ही प्राप्त करते हैं।
3. नम भूमि प्रवासी पक्षियो के लिए स्टेपिंग स्टोन का काम करते हैं बहुत से पक्षी अपने प्रजनन के लिए नम भूमि का चुनाव करते हैं।
4. नम भूमि तंत्र जल चक्र द्वारा जल को शुद्ध करता है प्रदूषण अवयवों को निकालता है तथा पोषक तत्वों के पुनः चक्रण को बनाए रखता है इसलिए  नम भूमि को किडनीज आफ दि लैंडस्केप भी कहते हैं।
5. नम भूमि को नर्सरी ऑफ लाइट भी कहा जाता है क्योंकि यह विभिन्न प्रकार के जलीयऔर थलीय जीवों व वनस्पतियों का निवास स्थान होते हैं।

उत्तर प्रदेश के नम भूमि क्षेत्र

उत्तर प्रदेश में कुल 328690 हेक्टेयर क्षेत्र नम भूमि के अंतर्गत आता है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख नम भूमि क्षेत्र:-
1. समसपुर नमभूमि — रायबरेली
2.लाख बहोसी नमभूमि - कन्नौज
3.नवाबगंज नमभूमि - उन्नाव
4.बघेल नमभूमि -श्रावस्ती
5.सांडी झील- हरदोई
6.समान झील- मैनपुरी
7.शेखा झील -अलीगढ़
8.नगरिया झील- लखीमपुर खीरी
9.पटना झील- इटावा
10.चन्देताल झील -बस्ती

नमभूमि क्षरण :- मुख्य कारण
1. कृषि और सिंचाई के लिए नमभूमि व नमभूमि उत्पादों का अति विदोहन।
2. प्रदूषण व जल परिवर्तन।
3. भूजल स्तर का कम होना ।
4.अव्यवस्थित रूप से जलमग्न क्षेत्रों का इस्तेमाल होना।
5.नम भूमि में अवांछनीय व खरपतवार का एकत्रित होना।
6. आवासीय क्षेत्रों के बढ़ने के कारण नम भूमि को मिट्टी डालकर काटने से जलागम क्षेत्र का संकुचित होना।
यह सभी नमभूमि परिस्थिति तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं तथा इसकी जैवविविधता को खत्म करके हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

नम भूमि संरक्षण हेतु उपाय जनसामान्य से अपेक्षाएं:-
1. नम भूमि का इस्तेमाल व्यवस्थित तथा सुचारु रुप से किया जाना चाहिए जिससे कि उसकी जीव और वनस्पति पर प्रतिकूल असर ना हो।
2.लैंडफिल जैसे क्रियाकलापों को जन सामान्य की मदद से रोका जाना चाहिए।
3.जनसामान्य को पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी जिससे कि जब भी कोई नमभूमि व नमभूमि जीवो को हानि पहुंचाए तो जनसामान्य ऐसा करने वाले अवांछित तत्वों को पकड़वाने व दंडित करने में सहयोग करें।

Thursday, 22 June 2017

जीवन का आइना

                  जीवन का आइना

एक शहर मे एक कॉलोनी थी। उस कॉलोनी में कई फ्लैट बने हुए थे और कुछ अमीर लोगों के बंगले भी थे। उसी में एक छोटे से फ्लैट में एक गरीब सा परिवार रहता था। ठीक उसी गरीब परिवार के फ्लैट के सामने एक अमीर परिवार का बड़ा आलीशान सा बंगला था।

बडी - बडी  गाड़ियां थीं, नौकर चाकर थे। गरीब परिवार में एक छोटा बच्चा था उसके पापा रोज उसे स्कूटर पर स्कूल छोड़ने जाते थे। वो बच्चा जब उस बंगले की तरफ देखता तो सोचता काश हमारा भी ऐसा ही घर होता। उस अमीर परिवार में भी एक बच्चा था, जब वो बच्चा बड़ी सी कार में स्कूल जाता और उसका ड्राइवर उसको स्कूल छोड़ने जाता तो वो गरीब बच्चा सोचता काश हम भी अमीर होते।

जब वो गरीब बच्चा उस अमीर बच्चे को देखता तो सोचता यार मेरी किस्मत कितनी खराब है,, उस लड़के की किस्मत कितनी अच्छी है

अब कहानी में थोड़ा सा रोमांचक मोड़ आता है, रोजाना शाम को कॉलोनी के सभी घरों के बच्चे इकट्ठे होकर आपस में खेल खेलते हैं, कभी क्रिकेट खेलते हैं तो कभी पकड़म पकड़ाई। पूरी शाम कॉलोनी के बच्चे खूब मजे करते हैं।

लेकिन उस अमीर घर के बच्चे को कहीं भी जाना allow नहीं है। सबसे पहले तो सिक्योरिटी का डर, आखिर अमीर घर का बच्चा है कोई अपहरण कर सकता है। दूसरा अमीर लोगों का एटीट्यूट होता है कि इन सब लोगों से हम अमीर हैं तो हम इनके साथ नहीं रहेंगे। इसलिए उस बच्चे के घर से बाहर जाने पर पाबन्दी थी।

अब वो बच्चा रोजाना शाम को अपने बंगले की छत पर खड़ा होकर उन कॉलोनी के सभी बच्चों को मस्ती करते देखता तो उसकी आखों में आंसू आ जाते। वो भी आजादी चाहता था, वो भी उन बच्चों के साथ खेलना चाहता था।

उस बच्चे के घर में हजारों खिलौने थे लेकिन उसके साथ खेलने वाला कोई नहीं था। पिताजी बिजनिस में बीजी रहते थे और मम्मी भी पार्टी और अपनी सहेलियों में बीजी रहती थी। अब बड़े से बंगले और कई नौकर चाकर होने पर भी वो लड़का खुद को अकेला और बदनसीब महसूस करता था।

वो बच्चा सोचता कि मेरी किस्मत कितनी खराब है कि मैं बच्चों के साथ खेल नहीं सकता,, काश मैं गरीब ही होता, कम से कम कहीं भी घूमने की आजादी तो होती, बच्चों और दोस्तों के साथ मस्ती तो करता।

अब आप ही बताइये कौन से बच्चे की किस्मत अच्छी है और कौन से बच्चे की खराब??…….

दोस्तों दरअसल किस्मत दोनों ही बच्चों की अच्छी है और दोनों की ही खराब है।

सब नजरिये का खेल है। आपको सिर्फ यही समझने की जरुरत है। जो चीज़ हमारे पास नहीं होती अगर हम उसके बारे में सोचें तो हमें अपनी किस्मत बुरी दिखाई देगी और वहीँ अगर हमारे पास जो है उसके बारे में सोचें तो किस्मत अच्छी दिखाई देने लगेगी।

दूसरों से आगे निकलने की होड़ में हम खुद अपनी किस्मत को बुरा मानते चले आते हैं जबकि आप जिस व्यक्ति से आगे निकलना चाहते हैं वो खुद किसी और वजह से अपनी किस्मत को बुरा मान रहा होता है।

एक छोटी चिड़िया तालाब के ऊपर से उड़ रही थी। उसने देखा कि मछली तालाब में तैर रही है बस तभी उसे लगा ये मछली तैर सकती है लेकिन मैं नहीं तैर सकती,, उफ्फ मेरी किस्मत ही खराब है।

बस यही हो रहा है आज कल…आपकी किस्मत आपके नजरिये पर निर्भर करती है। जो चीजें आपके पास नहीं हैं अगर आप हमेशा उनके बारे में सोचेंगे तो जिंदगी भर बदकिस्मत ही बने रहेंगे।

अगर आप हमेशा अपनी बीवी की बुराइयों पर ध्यान देंगे तो पक्का आप यही सोचेंगे मेरी किस्मत ही खराब है जो ऐसी बीवी मिली लेकिन अगर आप हमेशा अपनी बीवी की अच्छाइयों पर ध्यान देंगे तो आपको लगने लगेगा मेरी किस्मत कितनी अच्छी है। ये सिर्फ कहने की बात है, आजमा के देखिये फिर आप खुद जान जायेंगे।

आपकी किस्मत आपके हाथ में है। हर परिस्थिति के दो पहलू होते हैं – सकारात्मक और नकारात्मक,, अगर आप सकारात्मक नजरिये से देखेंगे तो किस्मत अच्छी दिखाई देगी और नकारात्मक नजरिये से देखेंगे तो किस्मत बुरी ही दिखाई देगी।
 

                 - आशुतोष सिंह