Tuesday, 11 May 2021

मेला

मेला आया मेला आया, 
बच्चे फिरते फूले-फूले।
मेले में वो जाएंगे ,
चाट पकौड़ी खाएंगे।
खेल-खिलौने लाएंगे, 
दृश्य कई मेले में देखे ।
सर्कस देखा तम्बू वाले,
झूला-झूले चकरी वाले।
कई मिले जाने अनजाने,
अपना-पन बढ़ता मेले से।
प्रेम का रंग चढ़ता मेले में,
मेला जब भी आता है ।
मन को खूब लुभाता है, 
मेला आया मेला आया।

-आशुतोष सिंह चौहान 

1 comment:

  1. बचपन याद आ गया जी 👌👍👌

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