Tuesday, 11 October 2022

🚩मर्यादित राम🚩

राम, 
सिया - राम, सिया - राम 
जय - जय राम! 
जन्म अयोध्या में पाकर,
रघु कुल के वंश वृक्ष बने ! 
माँ कौशल्या धन्य हुई,
दशरथ के तुम अंश बने! 
भरत लक्ष्मण शत्रुघ्न से, 
तीन प्रतापी भाई मिले! 
गुरु वशिष्ठ का ज्ञान मिले, 
प्रेम रूप सीता को पाया! 
राज तिलक के समारोह में, 
माँ कैकयी का अभिशाप मिला! 
पितृ आज्ञा के पालन में, 
14 वर्ष का वनवास मिला! 
अहिल्या को स्पर्श मात्र से, 
अभिशाप बंधन से मुक्त किया! 
सबरी की सेवा - पाकर, 
मन भावों को पूर्ण किया! 
सूर्पनखा के हठ की खातिर, 
सीता का अपहरण हुआ! 
सीता की खोज में, 
सुग्रीव, विभीषण जैसा मित्र मिला! 
हनुमान जैसा भक्त मिला, 
रावन का तारण करके! 
जन मानस को तृप्त किया, 
लव-कुश जैसे अंश मिले! 
इन सब गुणों को पाकर, 
फिर मर्यादित राम बने! 

राम, 
सिया - राम, सिया - राम
जय - जय राम! 

-आशुतोष सिंह चौहान 

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